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आईपीसी 26 बीएनएस में: धारा 2(29)
Reason to believe
IPC
26
BNS
2(29)
भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत धारा 26 “Reason to believe” से संबंधित थी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के 1 जुलाई 2024 से लागू होने के बाद, इसका समकक्ष प्रावधान बीएनएस की धारा 2(29) है। संहिता ने पूरी संहिता को पुनः क्रमांकित किया, इसलिए पुराना आईपीसी क्रमांक आगे नहीं चलता — यह आधिकारिक मैपिंग है।
यह पृष्ठ आधिकारिक धारा-संख्या संगति देता है। इस धारा हेतु ज़मानती/संज्ञेय स्थिति, सटीक दंड एवं विचारण न्यायालय अभी हमारे हस्त-सत्यापित गाइड सेट में नहीं हैं — निर्भर होने से पूर्व मूल अधिनियम देखें या वकील से पूछें।
आधिकारिक स्रोत
स्रोत: NCRB Sankalan Portal — official IPC/BNS Section Table. संकलित 2026-07-20. केवल संदर्भ हेतु — कानूनी सलाह नहीं। किसी भी दाखिले में उपयोग से पूर्व आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना एवं मूल अधिनियम से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आईपीसी धारा 26 का बीएनएस समकक्ष क्या है?
- आधिकारिक NCRB तुलनात्मक तालिका के अनुसार, आईपीसी धारा 26 (Reason to believe) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 2(29) से मेल खाती है।
- बीएनएस ने आईपीसी का स्थान कब लिया?
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लिया। उस तिथि से पहले दर्ज मामले आईपीसी के अंतर्गत ही चलते रहते हैं।
निकटवर्ती धाराएँ
- IPC 22 → BNS 2(21) · Movable property
- IPC 23 → BNS 2(36), 2(37), 2(38) · Wrongful gain, loss, and gaining/losing wrongfully
- IPC 24 → BNS 2(7) · Dishonestly
- IPC 25 → BNS 2(9) · Fraudulently
- IPC 27 → BNS 3(3) · Property in possession of wife, clerk or servant
- IPC 28 → BNS 2(4) · Counterfeit
- IPC 29 → BNS 2(8) · Document
- IPC 30 → BNS 2(31) · Valuable security