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आईपीसी → बीएनएस

आईपीसी 325 बीएनएस में: धारा 117(2)

स्वेच्छा से घोर उपहति कारित करना

IPC

325

BNS

117(2)

ज़मानती: हाँसंज्ञेय: हाँशमनीय: हाँ
अपराध
स्वेच्छा से घोर उपहति कारित करना
दंड
7 वर्ष तक कारावास, और जुर्माना।
विचारणीय
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
टिप्पणी
Single-source mapping (jurigram.com) — recommend independent Gazette confirmation before relying on the exact sub-clause.

स्रोत एवं सत्यापित

स्रोत: jurigram.com. सत्यापन दिनांक 2026-07-11. केवल संदर्भ हेतु — कानूनी सलाह नहीं। किसी भी दाखिले में उपयोग से पूर्व आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना एवं मूल अधिनियम से पुष्टि करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईपीसी 325 का बीएनएस समकक्ष क्या है?
आईपीसी धारा 325 (स्वेच्छा से घोर उपहति कारित करना) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 117(2) से मेल खाती है, जो 1 जुलाई 2024 को लागू हुई।
बीएनएस धारा 117(2) के अंतर्गत दंड क्या है?
7 वर्ष तक कारावास, और जुर्माना।
क्या यह ज़मानती और संज्ञेय है?
ज़मानती: हाँ। संज्ञेय: हाँ। विचारणीय: प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट। मूल अधिनियम से पुष्टि अवश्य करें।

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