आईपीसी → बीएनएस
आईपीसी 347 बीएनएस में: धारा 127(7)
Wrongful confinement to extort property or constrain to illegal act
IPC
347
BNS
127(7)
भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत धारा 347 “Wrongful confinement to extort property or constrain to illegal act” से संबंधित थी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के 1 जुलाई 2024 से लागू होने के बाद, इसका समकक्ष प्रावधान बीएनएस की धारा 127(7) है। संहिता ने पूरी संहिता को पुनः क्रमांकित किया, इसलिए पुराना आईपीसी क्रमांक आगे नहीं चलता — यह आधिकारिक मैपिंग है।
यह पृष्ठ आधिकारिक धारा-संख्या संगति देता है। इस धारा हेतु ज़मानती/संज्ञेय स्थिति, सटीक दंड एवं विचारण न्यायालय अभी हमारे हस्त-सत्यापित गाइड सेट में नहीं हैं — निर्भर होने से पूर्व मूल अधिनियम देखें या वकील से पूछें।
आधिकारिक स्रोत
स्रोत: NCRB Sankalan Portal — official IPC/BNS Section Table. संकलित 2026-07-20. केवल संदर्भ हेतु — कानूनी सलाह नहीं। किसी भी दाखिले में उपयोग से पूर्व आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना एवं मूल अधिनियम से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आईपीसी धारा 347 का बीएनएस समकक्ष क्या है?
- आधिकारिक NCRB तुलनात्मक तालिका के अनुसार, आईपीसी धारा 347 (Wrongful confinement to extort property or constrain to illegal act) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 127(7) से मेल खाती है।
- बीएनएस ने आईपीसी का स्थान कब लिया?
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लिया। उस तिथि से पहले दर्ज मामले आईपीसी के अंतर्गत ही चलते रहते हैं।
निकटवर्ती धाराएँ
- IPC 343 → BNS 127(3) · Wrongful confinement for three or more days
- IPC 344 → BNS 127(4) · Wrongful confinement for ten or more days
- IPC 345 → BNS 127(5) · Wrongful confinement of person for whose liberation writ has been issued
- IPC 346 → BNS 127(6) · Wrongful confinement in secret
- IPC 348 → BNS 127(8) · Wrongful confinement to extort confession or compel restoration of property
- IPC 349 → BNS 128 · Force
- IPC 350 → BNS 129 · Criminal force
- IPC 351 → BNS 130 · Assault