आईपीसी → बीएनएस
आईपीसी 77 बीएनएस में: धारा 15
Act of Judge when acting judicially
IPC
77
BNS
15
भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत धारा 77 “Act of Judge when acting judicially” से संबंधित थी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के 1 जुलाई 2024 से लागू होने के बाद, इसका समकक्ष प्रावधान बीएनएस की धारा 15 है। संहिता ने पूरी संहिता को पुनः क्रमांकित किया, इसलिए पुराना आईपीसी क्रमांक आगे नहीं चलता — यह आधिकारिक मैपिंग है।
यह पृष्ठ आधिकारिक धारा-संख्या संगति देता है। इस धारा हेतु ज़मानती/संज्ञेय स्थिति, सटीक दंड एवं विचारण न्यायालय अभी हमारे हस्त-सत्यापित गाइड सेट में नहीं हैं — निर्भर होने से पूर्व मूल अधिनियम देखें या वकील से पूछें।
आधिकारिक स्रोत
स्रोत: NCRB Sankalan Portal — official IPC/BNS Section Table. संकलित 2026-07-20. केवल संदर्भ हेतु — कानूनी सलाह नहीं। किसी भी दाखिले में उपयोग से पूर्व आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना एवं मूल अधिनियम से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आईपीसी धारा 77 का बीएनएस समकक्ष क्या है?
- आधिकारिक NCRB तुलनात्मक तालिका के अनुसार, आईपीसी धारा 77 (Act of Judge when acting judicially) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 15 से मेल खाती है।
- बीएनएस ने आईपीसी का स्थान कब लिया?
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लिया। उस तिथि से पहले दर्ज मामले आईपीसी के अंतर्गत ही चलते रहते हैं।
निकटवर्ती धाराएँ
- IPC 73 → BNS 11 · Solitary confinement
- IPC 74 → BNS 12 · Limit of solitary confinement
- IPC 75 → BNS 13 · Enhanced punishment for certain offences after previous conviction
- IPC 76 → BNS 14 · Act done by person bound or by mistake of fact believing himself bound by law
- IPC 78 → BNS 16 · Act done pursuant to judgment or order of Court
- IPC 79 → BNS 17 · Act done by person justified or by mistake believing himself justified by law
- IPC 80 → BNS 18 · Accident in doing a lawful act
- IPC 81 → BNS 19 · Act likely to cause harm without criminal intent to prevent other harm