आईपीसी → बीएनएस
आईपीसी 483 बीएनएस में: धारा 347(1)
Counterfeiting a property mark used by another
IPC
483
BNS
347(1)
भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत धारा 483 “Counterfeiting a property mark used by another” से संबंधित थी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के 1 जुलाई 2024 से लागू होने के बाद, इसका समकक्ष प्रावधान बीएनएस की धारा 347(1) है। संहिता ने पूरी संहिता को पुनः क्रमांकित किया, इसलिए पुराना आईपीसी क्रमांक आगे नहीं चलता — यह आधिकारिक मैपिंग है।
यह पृष्ठ आधिकारिक धारा-संख्या संगति देता है। इस धारा हेतु ज़मानती/संज्ञेय स्थिति, सटीक दंड एवं विचारण न्यायालय अभी हमारे हस्त-सत्यापित गाइड सेट में नहीं हैं — निर्भर होने से पूर्व मूल अधिनियम देखें या वकील से पूछें।
आधिकारिक स्रोत
स्रोत: NCRB Sankalan Portal — official IPC/BNS Section Table. संकलित 2026-07-20. केवल संदर्भ हेतु — कानूनी सलाह नहीं। किसी भी दाखिले में उपयोग से पूर्व आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना एवं मूल अधिनियम से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आईपीसी धारा 483 का बीएनएस समकक्ष क्या है?
- आधिकारिक NCRB तुलनात्मक तालिका के अनुसार, आईपीसी धारा 483 (Counterfeiting a property mark used by another) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 347(1) से मेल खाती है।
- बीएनएस ने आईपीसी का स्थान कब लिया?
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लिया। उस तिथि से पहले दर्ज मामले आईपीसी के अंतर्गत ही चलते रहते हैं।
निकटवर्ती धाराएँ
- IPC 477A → BNS 344 · Falsification of accounts
- IPC 479 → BNS 345(1) · Property mark
- IPC 481 → BNS 345(2) · Using a false property mark
- IPC 482 → BNS 345(3) · Punishment for using a false property mark
- IPC 484 → BNS 347(2) · Counterfeiting a mark used by a public servant
- IPC 485 → BNS 348 · Making or possession of any instrument for counterfeiting a property mark
- IPC 486 → BNS 349 · Selling goods marked with a counterfeit property mark
- IPC 487 → BNS 350(1) · Making a false mark upon any receptacle containing goods