आईपीसी → बीएनएस
आईपीसी 196 बीएनएस में: धारा 233
Using evidence known to be false
IPC
196
BNS
233
भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत धारा 196 “Using evidence known to be false” से संबंधित थी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के 1 जुलाई 2024 से लागू होने के बाद, इसका समकक्ष प्रावधान बीएनएस की धारा 233 है। संहिता ने पूरी संहिता को पुनः क्रमांकित किया, इसलिए पुराना आईपीसी क्रमांक आगे नहीं चलता — यह आधिकारिक मैपिंग है।
यह पृष्ठ आधिकारिक धारा-संख्या संगति देता है। इस धारा हेतु ज़मानती/संज्ञेय स्थिति, सटीक दंड एवं विचारण न्यायालय अभी हमारे हस्त-सत्यापित गाइड सेट में नहीं हैं — निर्भर होने से पूर्व मूल अधिनियम देखें या वकील से पूछें।
आधिकारिक स्रोत
स्रोत: NCRB Sankalan Portal — official IPC/BNS Section Table. संकलित 2026-07-20. केवल संदर्भ हेतु — कानूनी सलाह नहीं। किसी भी दाखिले में उपयोग से पूर्व आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना एवं मूल अधिनियम से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आईपीसी धारा 196 का बीएनएस समकक्ष क्या है?
- आधिकारिक NCRB तुलनात्मक तालिका के अनुसार, आईपीसी धारा 196 (Using evidence known to be false) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 233 से मेल खाती है।
- बीएनएस ने आईपीसी का स्थान कब लिया?
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लिया। उस तिथि से पहले दर्ज मामले आईपीसी के अंतर्गत ही चलते रहते हैं।
निकटवर्ती धाराएँ
- IPC 193 → BNS 229 · Punishment for false evidence
- IPC 194 → BNS 230 · Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of capital offence
- IPC 195 → BNS 231 · Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of offence punishable with imprisonment
- IPC 195A → BNS 232 · Threatening any person to give false evidence
- IPC 197 → BNS 234 · Issuing or signing false certificate
- IPC 198 → BNS 235 · Using as true a certificate known to be false
- IPC 199 → BNS 236 · False statement made in declaration which is by law receivable as evidence
- IPC 200 → BNS 237 · Using as true such declaration knowing it to be false