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आईपीसी 166B बीएनएस में: धारा 200
Punishment for non-treatment of victim
IPC
166B
BNS
200
भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत धारा 166B “Punishment for non-treatment of victim” से संबंधित थी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के 1 जुलाई 2024 से लागू होने के बाद, इसका समकक्ष प्रावधान बीएनएस की धारा 200 है। संहिता ने पूरी संहिता को पुनः क्रमांकित किया, इसलिए पुराना आईपीसी क्रमांक आगे नहीं चलता — यह आधिकारिक मैपिंग है।
यह पृष्ठ आधिकारिक धारा-संख्या संगति देता है। इस धारा हेतु ज़मानती/संज्ञेय स्थिति, सटीक दंड एवं विचारण न्यायालय अभी हमारे हस्त-सत्यापित गाइड सेट में नहीं हैं — निर्भर होने से पूर्व मूल अधिनियम देखें या वकील से पूछें।
आधिकारिक स्रोत
स्रोत: NCRB Sankalan Portal — official IPC/BNS Section Table. संकलित 2026-07-20. केवल संदर्भ हेतु — कानूनी सलाह नहीं। किसी भी दाखिले में उपयोग से पूर्व आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना एवं मूल अधिनियम से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आईपीसी धारा 166B का बीएनएस समकक्ष क्या है?
- आधिकारिक NCRB तुलनात्मक तालिका के अनुसार, आईपीसी धारा 166B (Punishment for non-treatment of victim) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 200 से मेल खाती है।
- बीएनएस ने आईपीसी का स्थान कब लिया?
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लिया। उस तिथि से पहले दर्ज मामले आईपीसी के अंतर्गत ही चलते रहते हैं।
निकटवर्ती धाराएँ
- IPC 159 → BNS 194(1) · Affray
- IPC 160 → BNS 194(2) · Punishment for committing affray
- IPC 166 → BNS 198 · Public servant disobeying law with intent to cause injury to any person
- IPC 166A → BNS 199 · Public servant disobeying direction under law
- IPC 167 → BNS 201 · Public servant framing an incorrect document with intent to cause injury
- IPC 168 → BNS 202 · Public servant unlawfully engaging in trade
- IPC 169 → BNS 203 · Public servant unlawfully buying or bidding for property
- IPC 170 → BNS 204 · Personating a public servant