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आईपीसी 166A बीएनएस में: धारा 199
Public servant disobeying direction under law
IPC
166A
BNS
199
भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत धारा 166A “Public servant disobeying direction under law” से संबंधित थी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के 1 जुलाई 2024 से लागू होने के बाद, इसका समकक्ष प्रावधान बीएनएस की धारा 199 है। संहिता ने पूरी संहिता को पुनः क्रमांकित किया, इसलिए पुराना आईपीसी क्रमांक आगे नहीं चलता — यह आधिकारिक मैपिंग है।
यह पृष्ठ आधिकारिक धारा-संख्या संगति देता है। इस धारा हेतु ज़मानती/संज्ञेय स्थिति, सटीक दंड एवं विचारण न्यायालय अभी हमारे हस्त-सत्यापित गाइड सेट में नहीं हैं — निर्भर होने से पूर्व मूल अधिनियम देखें या वकील से पूछें।
आधिकारिक स्रोत
स्रोत: NCRB Sankalan Portal — official IPC/BNS Section Table. संकलित 2026-07-20. केवल संदर्भ हेतु — कानूनी सलाह नहीं। किसी भी दाखिले में उपयोग से पूर्व आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना एवं मूल अधिनियम से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आईपीसी धारा 166A का बीएनएस समकक्ष क्या है?
- आधिकारिक NCRB तुलनात्मक तालिका के अनुसार, आईपीसी धारा 166A (Public servant disobeying direction under law) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 199 से मेल खाती है।
- बीएनएस ने आईपीसी का स्थान कब लिया?
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लिया। उस तिथि से पहले दर्ज मामले आईपीसी के अंतर्गत ही चलते रहते हैं।
निकटवर्ती धाराएँ
- IPC 158 → BNS 189(8) · Being hired to take part in unlawful assembly or riot
- IPC 159 → BNS 194(1) · Affray
- IPC 160 → BNS 194(2) · Punishment for committing affray
- IPC 166 → BNS 198 · Public servant disobeying law with intent to cause injury to any person
- IPC 166B → BNS 200 · Punishment for non-treatment of victim
- IPC 167 → BNS 201 · Public servant framing an incorrect document with intent to cause injury
- IPC 168 → BNS 202 · Public servant unlawfully engaging in trade
- IPC 169 → BNS 203 · Public servant unlawfully buying or bidding for property